वास्तु के अनुसार 8 दिशाएं और उनके महत्व | (8 Vastu Dishaye Aur Unke Mahattva )

वास्तु के अनुसार 8 दिशाएं और उनके महत्व | (8 Vastu Dishaye Aur Unke Mahattva )

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वास्तुकला कोई नया उपहार नहीं है। प्राचीन काल के लोगों ने ऐसी संरचनाएँ बनाई हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। एक कारण यह भी है कि ऐसी संरचनाएँ बिना क्षतिग्रस्त हुए इतने लंबे समय से टिकी हुई हैं, ऐसा माना जाता है कि इनका निर्माण वास्तुशास्त्र के अनुसार ही हुआ है। हिंदू और बौद्ध धर्मो कि यह मान्यता और विश्वास है कि, वास्तु इस बारे में बताती है कि किसी इमारत को बनाते समय वह बिलकुल सही दिशा के तरफ ही होनी चाहिए। इसे स्पष्ट रूप से कहें तो, कुल 8 वास्तु दिशाएँ (8 Vastu Dishaye) हैं और उन्हें इस गाइड के द्वारा आपको समझाया जाएगा।

लेकिन इससे पहले कि हम आपको प्रत्येक वास्तु दिशा के महत्व के बारे में बताएं, हम सबसे जरुरी बात कहना चाहेंगे – क्या वास्तव में वास्तु इतना जरूरी है? इस प्रश्न के जबाब के रूप में, आप इस गाइड को नहीं पढ़ रहे होते, अगर आपको वास्तु की ताकत पर विश्वास नहीं होता। अब, तथ्यों के बारे में बात करते हैं।

वास्तु को जरूरी क्या बनाता है? (Vastu Ko Jaruri Kya Bnaata Hai?)

  • सभी वास्तु दिशाएं एक देवता और उनके स्वयं के ग्रह द्वारा संचालित और नियंत्रित होती हैं। यदि संरचना या ढाचां सही तरीके से नहीं बनाई गई है, तो वास्तु दोष को घर में बहुत सारी नकारात्मकता के साथ लाया जाता है क्योंकि उन दिशाओ से सम्बंधित देव और ग्रह प्रसन्न नहीं होते ।
  • वास्तु में सभी दिशाएं ही मायने रखती हैं। लेकिन, वे तभी शुभ होते हैं जब संरचना या स्ट्रक्चर सही तरीके से बनाई जाती है।

तो, हाँ, हमारी राय में, वास्तु के द्वारा समझाए गए वास्तु निर्देशों का पालन करना काफी जरूरी है। 

 

आइये अब आपको उन सभी 8 वास्तु दिशाओं के महत्व (8 Vastu Dishaye Aur Unke Mahattva) के बारे में बतलाते हैं।

 

  1. उत्तर वास्तु दिशा (Uttar Vastu Disha)

यह सबसे शुभ वास्तु दिशाओं में से एक, वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा धन, समृद्धि और खुशी का प्रतीक है।

वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • उत्तर दिशा का स्वामी कुबेर है और वो धन-दौलत के देवता है।
  • उत्तर दिशा को कैरियर की दिशा के रूप में भी जाना जाता है।

एक इमारत के बारे में विशेष बातें जो वास्तु के अनुसार बनाई गई हो

  • उत्तर में बड़े और हवादार खुले मैदान होने चाहिए । ऐसा माना जाता है कि बहुत सारी सकारात्मक ऊर्जा उत्तर दिशा से ही आती है ।
  1. दक्षिण वास्तु दिशा (Dakshin Vastu Disha)

दक्षिण एक वास्तु दिशा है जिसका जीवन और मृत्यु के मामले में बहुत अधिक महत्व है, इस दिशा के स्वामी यम देव है। यदि इस दिशा में दोष हो, तो व्यक्ति को बहुत अधिक नकारात्मकता के फैलने की उम्मीद करनी चाहिए।

वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • चूँकि दक्षिण दिशा के स्वामी यम देव है, इसलिए एक बुरी दिशा के रूप में इसकी व्याख्या कि जाती है। लेकिन यह बिल्कुल सच नहीं है।
  • वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा वह जगह है जहाँ उत्तर दिशा से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा जमा होती है।

एक इमारत के बारे में विशेष बातें जो सही वास्तु के अनुसार बनाई गई हो।

  • चूंकि इस दिशा का स्वामी यम है, इसलिए यह जरुरी है कि इस दिशा में कोई दरवाजा या खिड़की न हों। आज्ञानुसार, दक्षिण दिशा की ओर वाले कमरों में कुछ भी खुला नहीं होना चाहिए।
  1. पूर्व वास्तु दिशा (Purva Vastu Disha)

अन्य सभी वास्तु दिशाओं में से, यह पूर्व दिशा है जो यह निर्धारित करती है कि किसी घर में जीवन समृद्ध रूप से फल सकता है या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिशा के स्वामी देवता भगवान इंद्र हैं और शासक अथवा नियंत्रक ग्रह सूर्य देव हैं। एकसाथ मिलकर, ये दोनों ताकतें बहुत मजबूत हो जाती है ।

  • सूर्य जीवन देने वाला है। यह पृथ्वी पर सारे जीवन का निर्वाह करता है।
  • इन्द्र वर्षा देने वाला है। वर्षा एक ऐसा तत्व है जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए बहुत जरुरी है।

जब सही से बनाया जाता है, तो आपके रास्ते में भाग्य खुद चलकर आएगा। अन्य लाभ इस प्रकार हैं।

  • आपका घर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाएगा।
  • आप खुद की एक बहुत शक्तिशाली और अच्छी सामाजिक प्रतिष्ठा बनायेंगे।

यह भी पढ़े – Kaal Sarp Dosh – कैसे पता करें कि आपको यह दोष है और इसे दूर कैसे करें?

वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा के बारे में रोचक तथ्य

  • वास्तु दोष मुक्त होने के लिए घर का पूर्वी भाग बहुत बड़ा और हवादार होना चाहिए।
  • पूर्व दिशा की ओर एक बाथरूम या एक स्टोर रूम की तरह बाधक कमरे का निर्माण करना वास्तु के विरुद्ध है।
  1. पश्चिम वास्तु दिशा (Paschim Vastu Disha)

भगवान वरुण द्वारा शासित और नियंत्रित – आकाश, महासागर और हवा के देवता – और शनि द्वारा शासित – शक्ति और क्रोध का ग्रह – पश्चिम दिशा, वास्तु दिशाओं की सूची में एक प्रमुख स्थान रखता है।

 वास्तु के अनुसार पश्चिम दिशा के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • पश्चिम दिशा में मुख्य रूप से किसी भी प्रकार का खुलापन नहीं होना चाहिए।
  • ऐसा माना जाता है कि सूर्य द्वारा प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा पश्चिम दिशा में एकत्रित होती है। यदि इस दिशा में कोई भी खुलापन हो, तो सकारात्मक ऊर्जा बहार चली जाएगी।
  • यह सलाह दी जाती है कि पश्चिम की ओर की दीवारों को मोटा बनाया जाए।

अब, वास्तु दिशाओं की सूचि में 4 सबलेट्स अथवा उन ४ मुख्य दिशाओ के जोड़ भी शामिल है – पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम। इन वास्तु दिशाओं में से प्रत्येक ही बहुत जरुरी हैं। इसलिए, हमने इन्हें भी यहाँ अच्छे से बताया है।

  1. पूर्वोत्तर वास्तु दिशा (Purvottar Vastu Disha)

सकारात्मकता और समृद्धि दोनों के मामले में पूर्वोत्तर एक शानदार दिशा है। यह भगवान शिव के स्वामित्व में है और उत्तर-पूर्व दिशा को चलाने वाला, बृहस्पति ग्रह है। और दिलचस्प बात यह है कि बृहस्पति ज्ञान का ग्रह है (जो कि ज्ञान का प्रतीक है)।

वास्तु के अनुसार पूर्वोत्तर दिशा के बारे में रोचक तथ्य

  • उत्तर-पूर्व दिशा में एक शौचालय, स्टोर रूम और यहाँ तक ​​कि बेडरूम बनाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। इसे अशुभ माना जाता है।
  • उत्तर पूर्व की ओर चिमनी का निर्माण न करें। इसे आग से संबंधित दुर्घटनाओं के निमंत्रण के रूप में माना जाता है।

जब यह सही बनाया जाता है, तो यह दिशा छात्रों को ज्ञान का आशीर्वाद देती है। यदि गलत तरीके से बनाया गया हो, तो यह घर में रहने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

  1. उत्तर-पश्चिम वास्तु दिशा (Uttar-paschim Vastu Disha)

इस दिशा के स्वामी वायुदेव हैं जो हवा और तूफान के भगवान और सत्तारूढ़ अथवा इसे चलाने वाला ग्रह, चंद्रमा है।

यदि कोई घर उत्तर-पश्चिम दिशा के कारण वास्तु दोष से ग्रस्त है, तो यहाँ इसका क्या मतलब है।

  • घर में लगातार नकारात्मकता के कारण निवासियों को बहुत अधिक बेचैनी का सामना करना पड़ेगा।
  • यह निवासियों की मानसिक शांति को भी प्रभावित करेगा।

जब सही से बनाया जाता है, तो यह आपके करियर में सफलता के शिखर पर चढ़ने में मदद करता है।

  1. दक्षिण-पूर्व वास्तु दिशा (Dakshin-purva Vastu Disha)

भगवान अग्निदेव जो अग्नि के देवता है और शुक्र ग्रह इस दिशा में शासन करते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि दक्षिण-पूर्व वह जगह है जहाँ चिमनी, आग से जुड़ी हर चीज होनी चाहिए।

  1. दक्षिण-पश्चिम वास्तु दिशा (Dakshin-paschim Vastu Disha)

दक्षिण-पश्चिम दिशा का स्वामी निऋति है, जो एक दानव है और यह दिशा राहु (छाया) ग्रह द्वारा शासित है।

जब यह सही से बनाया जाता है, तो आपको शुभकामनाएँ और बहुत कुछ मिलता है:

  • आप अच्छे पैसे कमाएँगे।
  • आपको सभी से प्यार होगा।
  • आप बहुत ख्याति अर्जित करेंगे।

जब गलत बनाया जाता है, तो आप कठिन समय का सामना करते हैं।

  • चिंता, अवसाद और आत्मघाती विचार आपको परेशान करेंगे।
  • आप गंभीर वित्तीय परेशानियों का सामना करेंगे।

कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

वास्तु दिशाएं न केवल धन को बल्कि स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए, घर बनाते समय वास्तु नियमों का पूरी तरह से ध्यान रखें।

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Significance of 8 Vastu Directions in Astrology : Detailed Guide!